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भगोड़ा आर्थिक अपराध विधेयक, 2018

May 17th, 2018
Fugitive Economic Offenses Bill, 2018
  • क्या  है विधेयक?
  • देश छोड़कर भागने वाले आर्थिक अपराधियों तथा चूक कर्ताओं (Defaulters) की संपत्ति जब्त करने का अधिकार का कानून निर्माण हेतु विधेयक।
  • उद्देश्य
  • आर्थिक अपराध करने वालों के देश छोड़कर भारतीय कानून की प्रक्रिया से बचने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाना।
  • भगोड़ा आर्थिक अपराधी कौन होगा?
  • इस कानून के तहत उस व्यक्ति को भगोड़ा आर्थिक अपराधी माना जाएगा, जिसके खिलाफ किसी अधिसूचित अपराध में न्यायालय द्वारा वारंट जारी किया गया है और उसने अभियोग से बचने  हेतु देश छोड़ दिया है अर्थात विदेश भाग गया हो तथा भारत वापस आने से इंकार कर रहा हो।
  • प्रावधान
  • विधेयक के पारित होने के पश्चात यह कानून ऐसे मामलों में लागू होगा, जहां अपराध की राशि 100 करोड़ रुपये से अधिक हो।
  • यह विधेयक, वित्तीय खुफिया इकाई (Financial Intelligence Unit-FIU) को आर्थिक अपराधी को भगोड़ा घोषित करने और संपत्ति जब्त करने को लेकर आवेदन देने की अनुमति देता है।
  • ऐसे मामलों में जहां कोई व्यक्ति भगोड़ा घोषित होने के पूर्व किसी भी समय कार्यवाही के दौरान भारत वापस आ जाता है और सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश होता है, तो उस स्थिति में प्रस्तावित अधिनियम  के अंतर्गत कार्यवाही रोक दी जाएगी।
  • इसके पश्चात उसे सभी आवश्यक संवैधानिक रक्षा उपाय जैसे अधिवक्ता के माध्यम से व्यक्ति को सुनवाई का अवसर देना, उत्तर दाखिल करने हेतु समय देना, उसे भारत अथवा विदेश में समन भिजवाना तथा उच्च न्यायालय में अपील करने जैसे अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
  • इस विधेयक में एक विशेष न्यायालय (धन-शोधन रोकथाम अधिनियम, 2002 के अंतर्गत) का प्रावधान है।
  • विधेयक में प्रक्रियागत प्रावधान
  1. किसी व्यक्ति के भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित होने पर विशेष न्यायालय के समक्ष आवेदन करना।
  2. विशेष अदालत आर्थिक अपराधी को भगोड़ा घोषित करेगी।

         iii.  भगोड़ा आर्थिक अपराधी की संपत्ति को जब्त किया जाएगा।

  1. विशेष न्यायालय भगोड़े अपराधी को नोटिस जारी करेगा।
  2. ऐसे अपराधी की बेनामी संपत्ति सहित भारत और विदेशों में स्थित उसकी अन्य संपत्तियां जब्त की जाएंगी।
  3. भगोड़े आर्थिक अपराधी को किसी भी सिविल दावे का बचाव करने से अपात्र बनाना।

           vii. अधिनियम के अंतर्गत जब्त संपत्ति के प्रबंधन और निपटान हेतु एक प्रशासक की नियुक्ति की जाएगी।

  • लाभ एवं प्रभाव
  1. इस विधेयक से भगोड़े आर्थिक अपराधियों के संबंध में कानून का राज पुनर्स्थापित होने की संभावना है।
  2. इस विधेयक के कानून बन जाने के बाद ऐसे आर्थिक अपराधियों को भारत आने के लिए बाध्य किया जाएगा और वे सूचीबद्ध अपराधों का कानूनी सामना करने हेतु बाध्य होंगे।

          iii.  इससे आर्थिक अपराधियों द्वारा की गई वित्तीय चूकों में अंतर्विष्ट रकम की उच्चतर वसूली में बैंकों और अन्य वित्तीय                    संस्थाओं को मदद प्राप्त होगी और ऐसी संस्थाओं की वित्तीय स्थिति में सुधार होगा।

  • इस विधेयक की आवश्यकता क्यों पड़ी?
  • आर्थिक अपराधियों के, आपराधिक कार्यवाही के दौरान अथवा आर्थिक अपराधों के मामलों पर कार्यवाही की संभावना होने पर भारतीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र से भाग निकलने के कई उदाहरण सामने आए हैं।
  • ऐसे आर्थिक अपराधियों के भारतीय न्यायालयों में अनुपस्थिति से कई हानिकारक परिणाम होते हैं, यथा-
  1. आपराधिक मामलों में जांच प्रभावित होती है।
  2. अदालतों के बहुमूल्य समय की बर्बादी।

       iii.  भारत में कानून के शासन में कमी।

  • इसके अलावा आर्थिक अपराधों के अधिकांश मामलों में बैंक के ऋणों की गैर-अदायगी से भारत में बैंकिंग क्षेत्र की वित्तीय स्थिति बुरी तरह से प्रभावित होती है।
  • कानून के मौजूदा नागरिक एवं आपराधिक प्रावधान समस्या की गंभीरता से निपटने के लिए पूरी तरह से पर्याप्त नहीं हैं।
  • अतः इस प्रकार के अपराधों को नियंत्रित करने हेतु एक प्रभावी, त्वरित और संविधानसम्मत निवारक प्रावधान की आवश्यकता महसूस की गई।
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
  • 1 मार्च, 2018 को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक, 2018’ को संसद में रखने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई।
  • 12 मार्च, 2018 को लोक सभा में यह विधेयक प्रस्तुत किया गया।
  • उल्लेखनीय है कि भ्रष्टाचार से संबंधित मामलों में गैर-दोषसिद्ध आधारित संपत्ति के जब्त करने की प्रवृत्ति, अपराध के प्रति संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (भारत द्वारा वर्ष 2011 में मान्य) से अनुसमर्थित है।
  • इस विधेयक में इसी सिद्धांत को अंगीकार किया गया है।
  • ज्ञातव्य है कि सरकार द्वारा आम बजट 2017-18 में इस प्रकार का विधेयक लाने की घोषणा की गई थी।
  • आर्थिक अपराधों की सूची को इस विधेयक की तालिका में अंतर्विष्ट किया गया है।
  • लेखक-अम्बरीश कुमार तिवारी