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ब्रह्मांड में सबसे दूर स्थित तारा

May 18th, 2018
NASA
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 2 अप्रैल, 2018 को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार उसने ‘हबल अंतरिक्ष दूरबीन’ की मदद से एक ऐसे तारे की खोज की है, जो ब्रह्मांड में अब तक देखे गए तारों में सबसे दूर स्थित है।
  • इकारस
  • इस नव अन्वेषित तारे को इकारस (Icarus) नाम दिया गया है।
  • यह नाम यूनान के एक पौराणिक पात्र ‘इकारस’ के नाम पर रखा गया है।
  • ऐसी मान्यता है कि यह पौराणिक पात्र अपने मोम के बने पंखों से उड़कर सूर्य के अत्यधिक निकट पहुंच गया था जिससे उसके पंख पिघल गए थे।
  • हालांकि इस तारे का आधिकारिक नाम ‘‘MACS J1149 + 2223 Lensed Star-1’’ है।
  • तारे का विवरण
  • नव अन्वेषित इकारस तारा एक सुदूर सर्पिलाकार (Spiral) आकाशगंगा में स्थित है।
  • यह तारा ब्रह्मांड में इतनी दूर स्थित है कि इसके प्रकाश को पृथ्वी तक पहुंचने में लगभग 9 बिलियन वर्ष लग जाएंगे।
  • अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार, यह तारा पृथ्वी के सूर्य की तुलना में 10 लाख गुना तक अधिक चमकीला तथा लगभग दोगुना अधिक गर्म है।
  • इस अतिविशाल नीले रंग के तारे को ब्लू सुपरजायंट (Blue Supergiant) भी कहते हैं।
  • गुरुत्वीय लेंसिंग
  • विश्व की सबसे बड़ी दूरबीनों की मदद से भी यह तारा बहुत धुंधला ही दिखाई पड़ेगा।
  • अतः इस तारे को स्पष्ट देखने के लिए ‘गुरुत्वीय लेंसिंग’ (Gravitational Lensing) नामक परिघटना का प्रयोग किया गया।
  • इस परिघटना के तहत इकारस तारे के अग्रभाग (Fore Ground) में स्थित आकाशगंगाओं के एक विशाल समूह ने प्राकृतिक लेंस के रूप में कार्य कर तारे के प्रकाश को परिवर्धित (Amplify) करने में मदद की।
  • इकारस के मामले में पृथ्वी से 5 बिलियन प्रकाशवर्ष दूर आकाशगंगा समूह MACS J1149+2223 ने प्राकृतिक आवर्धक लेंस (Magnifying lens) के रूप में कार्य किया।
  • खोजकर्ता दल
  • जिस अनुसंधानकर्ता दल ने इकारस तारे की खोज की, उसमें स्पेन तथा दक्षिण कैरोलीना विश्वविद्यालय, कोलम्बिया (अमेरिका) के वैज्ञानिक शामिल थे।
  • निष्कर्ष
  • गुरुत्वीय लेंसिंग के माध्यम से इकारस की खोज से खगोलशास्त्रियों को दूरस्थ आकाशगंगाओं में स्थित एकल तारों के अध्ययन का एक नया तरीका प्राप्त हो गया है।
  • इन प्रेक्षणों से तारों (विशेष रूप से सर्वाधिक चमकीले तारों) की उत्पत्ति से संबंधित विस्तृत अध्ययन संभव हो सकेगा।

लेखक-सौरभ मेहरोत्रा