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नगालैंड वाटर स्ट्राइडर की नई प्रजाति की खोज

May 18th, 2018
Zoological survey of India
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI : Zoological survey of India) के वैज्ञानिकों ने नगालैंड में पेरेन जिले के इंतांकी (Intanki) नदी में ‘वाटर स्ट्राइडर’ (Water Strider) की नई प्रजातियों की खोज की है।
  • यह खोज विज्ञान जर्नल जूटाक्सा (Zootaxa) में प्रकाशित हुई थी।
  • महत्वपूर्ण तथ्य
  • वाटर स्ट्राइडर की खोजी गई नई प्रजातियों के नाम ‘तिलोमेरा नगालैंड जेहामलार’ (Ptilomera Nagalanda jehamalar) और ‘चंद्रा’ (chandra) है।
  • उल्लेखनीय है वाटर स्ट्राइडर जल की सतह पर जीवन व्यतीत करने वाले कीटों (Insects) का एक समूह है।
  • नई खोजी गई नारंगी रंग की इस प्रजाति के पृष्ठ भाग पर काली धारियां हैं और पीले-भूरे रंग का उदर है।
  • साथ ही इसके लंबे पतले पैर हैं जिनकी लंबाई 11.79 मिमी. है।
  • इस प्रजाति के पृष्ठ भाग पर काली धारियों की उपस्थिति वाटर स्ट्राइडर की अन्य ज्ञात प्रजातियों से इसे अलग करती है।
  • भारत में वाटर स्ट्राइडर की उप-प्रजाति तिलोमेरा की केवल प्रजातियों की 5 प्रजातियों, नामतः तिलोमेरा एग्रीओडस (प्रायद्वीपीय भारत), तिलोमेरा असमेंसिस (पूर्वोत्तर भारत), तिलोमेरा लैटीक्यूडाटा (उत्तरी एवं पूर्वोत्तर भारत), तिलोमेरा ऑक्सीडेंटालिस (उत्तराखंड) और तिलोमेरा टिग्रीना (अंडमान द्वीपसमूह) की खोज की गई है।
  • नगालैंड में इस नई प्रजाति की खोज से इनकी संख्या 6 हो गई है।
  • वाटर स्ट्राइडर पानी की गुणवत्ता के अच्छे संकेतक हैं और मच्छरों के लार्वा का शिकार करके खाद्य शृंखला में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • भारत में खुले समुद्र, तालाब, झील, नदियों आदि में वाटर स्ट्राइडर की लगभग 100 प्रजातियां पाई जाती हैं।
  • तिलोमेरा प्रजाति कम सूर्य की रोशनी प्राप्त करने वाली चट्टानी, तीव्र प्रवाही जलधाराओं और नदियों में पाई जाती है।
  • इस प्रजाति के कीटों के मध्य पैर में पाए जाने वाले बाल इनको जलधारा के तीव्र प्रवाह से प्रतिरोध प्रदान करते हैं।
  • वाटर स्ट्राइडर के तीन जोड़ी पैर होते हैं और आगे के पैर मध्य एवं पिछले पैरों की तुलना में छोटे होते हैं।

लेखक-नीरज ओझा