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क्लोन असमिया कटड़े (बछड़ा) का जन्म

May 21st, 2018
Birth of clone Assamese cats (calves)
  • वर्तमान परिदृश्य
  • 16 मार्च, 2018 को केंद्रीय भैंस विषयक अनुसंधान संस्थान (Central Institute for Research on Buffaloes : CIRB), हिसार के वैज्ञानिकों ने असमिया भैंस के एक क्लोन बछड़े का जन्म कराने में सफलता का दावा किया।
  • महत्वपूर्ण तथ्य
  • इस क्लोन कटड़े (बछड़ा) का जन्म 22 दिसंबर, 2017 को हुआ था।
  • इसका जन्म मुर्रा भैंस के गर्भ से सामान्य प्रसव द्वारा हुआ था।
  • जन्म के समय इसका वजन 54.2 किग्रा. था।
  • CIRB हिसार के वैज्ञानिक ने पहली बार असमिया भैंस के क्लोन का जन्म कराने में सफलता प्राप्त की है।
  • यह भैंस का दूसरा क्लोन कटड़ा है। भारत का पहला भैंस का क्लोन कटड़ा हिसार-गौरव (Hisar-Gaurav) का जन्म 11 दिसंबर, 2015 को हुआ था।
  • विश्व का यह पहला क्लोन है जिसका जन्म एक खेत में हुआ है।
  • इसका जन्म उच्च प्रौद्योगिकी वाले ‘सच डेयरी फार्म’ (Sach Dairy farm) की क्लोनिंग प्रयोगशाला से 100 किमी. की दूरी पर एक खेत में हुआ।
  • ज्ञातव्य है कि भ्रूण को प्राप्तकर्ता माता में स्थानांतरित होने से लगभग दो घंटा पूर्व पहुंचाया गया।
  • असमिया भैंस देश के पूर्वोत्तर भागों में पाई जाती है।
  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सीआईआरबी को भैंस की सभी नस्लों के उत्तम पशुओं के संरक्षण की जिम्मेदारी है।
  • क्लोनिंग के तथ्य
  • किसी भी जीव का प्रतिरूप बनाना क्लोनिंग कहलाता है।
  • क्लोन एक ऐसी जैविक रचना है, जो मात्र जनक (माता/पिता) से गैर-लैंगिक विधि द्वारा उत्पन्न होती है।
  • क्लोन शारीरिक एवं आनुवांशिक रूप से अपने जनक के पूर्णतः समरूप होता है।
  • मवेशियों की क्लोनिंग से उच्च कोटि की नस्लें उत्पन्न की जा सकेंगी और वह भी बिना किसी आनुवांशिक गुण हानि के।
  • इस क्लोनिंग का सबसे बड़ा फायदा डेयरी क्षेत्र में होगा जिसमें दूध देने वाली अच्छी नस्ल की भैंसों की संख्या में वृद्धि होगी।

लेखक-रमेश चंद्र